वॉक्स-डी-सर्ने, फ्रांस: अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो शुक्रवार को फ्रांस में G7 (ग्रुप ऑफ सेवन) के अन्य विदेश मंत्रियों से मुलाकात की है। यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने NATO देशों पर ईरान युद्ध में मदद ना करने पर तीखा हमला बोला है। ट्रंप ने NATO पर नाराजगी जताते हुए कहा, “हम NATO से बहुत निराश हैं, क्योंकि उन्होंने बिल्कुल कुछ नहीं किया।” उन्होंने कहा कि NATO देश रूस से अपनी रक्षा के लिए अमेरिका पर निर्भर रहते हैं, लेकिन जब ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजरायल की मदद की बारी आई तो वो पीछे हट गए। ट्रंप ने यह भी कहा है कि NATO देश होर्मुज स्ट्रेट को सुरक्षित करने में भी अमेरिका की मदद नहीं कर रहे हैं, जिससे तेल की आपूर्ति प्रभावित हो रही है और दाम बढ़ गए हैं।
अभी सामने नहीं आया बयान
रूबियो के सामने अब G7 के बाकी देशों (ब्रिटेन, कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली और जापान) को अमेरिका की ईरान नीति पर राजी करना एक बड़ी चुनौती है। लगभग सभी देश इस युद्ध को लेकर संशय में हैं और आपत्ति जता रहे हैं। बैठक स्थल पर पहुंचकर रूबियो ने दूसरे विदेश मंत्रियों के साथ ग्रुप फोटो खिंचवाई, लेकिन किसी ने भी कोई बयान नहीं दिया। ट्रंप की कड़ी टिप्पणियों के कुछ घंटे बाद ही रूबियो वॉशिंगटन से फ्रांस के लिए रवाना हुए थे।
रूबियो ने क्या कहा?
रूबियो ने फ्रांस जाने से पहले साफ कहा था कि मैं उन्हें खुश करने के लिए वहां नहीं जा रहा हूं। मैं फ्रांस, जर्मनी या जापान के लिए नहीं, बल्कि अमेरिका के लोगों के लिए काम करता हूं। उन्होंने कहा था कि दुनिया को अमेरिका के राष्ट्रपति का शुक्रिया अदा करना चाहिए जो ऐसे खतरे का सामना करने को तैयार है।
G7 देशों की चिंता, किसने क्या कहा?
फ्रांस के रक्षा प्रमुख जनरल फैबियन मैंडन ने कहा है कि अमेरिका ने उन्हें युद्ध शुरू करने की कोई सूचना नहीं दी। उन्होंने कहा, “अमेरिका अब पहले जैसा अनुमान लगाने लायक सहयोगी नहीं रहा।” जर्मनी के विदेश मंत्री जोहान वेडेफुल ने कहा है कि यूक्रेन के लिए समर्थन अब कम नहीं होना चाहिए। उन्होंने मध्य पूर्व में स्थिरता लाने और होर्मुज जलडमरूमध्य को सुरक्षित करने पर भी जोर दिया। ब्रिटेन की विदेश सचिव यवेट कूपर ने कहा कि ईरान पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को बंधक नहीं बना सकता। उन्हें साझेदारी और कूटनीति की जरूरत है।
धमकियों के खिलाफ आगे आएं देश
रूबियो ने कहा कि जो देश अंतरराष्ट्रीय कानून का सम्मान करते हैं, उन्हें ईरान की जहाजरानी पर दी जा रही धमकियों के खिलाफ आगे आना चाहिए। रूबियो को उम्मीद है कि चर्चा से कुछ सकारात्मक नतीजे निकलेंगे।
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